कानपुर

करवाचौथ आज: सज गईं सुहागिनें, जानें कितने बजे निकलेगा चांद; बादलों में छिप गया तो ऐसे खुलेगा व्रत

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By admin On October 29, 2026
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करवाचौथ पर अगर बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई न दे तो ऐसी स्थिति में व्रतियों को रात 8:09 बजे के बाद ईशान कोण में पूर्व दिशा की ओर विधि-विधान से पूजन कर संकल्प लेकर अर्घ्य देना चाहिए। इस दौरान चावल की वेदी पर चंद्रमा बनाकर निर्धारित समय पर अर्घ्य देकर करवा पूजन करना फलदायी होगा।

इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि बादलों की वजह से चंद्रमा का दर्शन न होने पर व्रत के दौरान भगवान शिव और लक्ष्मी नारायण का स्मरण करना चाहिए।

इस दौरान अपने पितृ जनों का स्मरण करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही परंपरा अनुसार अपने सास और ससुर को ही प्रथम थाली परोसे। वह ही सबके लिए सर्वगुण संपन्न देवता हैं।

अगर वे न हों तो परिवार के बड़े को भोजन की थाली परोसें। यह व्रत संकल्प के साथ लिया जाता है। कोई भी न हो तो किसी भूखे को भोजन कराएं। यह पुण्य प्रताप का साधन होगा।

आचार्य मनीष स्वामी बताते हैं कि करवाचौथ के व्रत का पारण भगवान चंद्रदेव के दर्शन करने के बाद ही करना चाहिए। अगर विपरीत परिस्थितियों में चंद्रमा के दर्शन संभव न हों तो संकल्प लेकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
साथ ही विधि-विधान के अनुसार व्रत का पारण करें। कोई बाधा नहीं है। सास, ससुर, जेठानी और अन्य परिवार में जो भी अग्रज हैं उनको पूजें। व्रत का पारण करें।
मुहूर्त
इस साल करवा चौथ की मुख्य पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 05:38 बजे से शाम 06:56 बजे तक रहेगा। करवा माता की पूजा और व्रत कथा सुनने के लिए सुहागिनों को 1 घंटे 18 मिनट का उत्तम समय मिलेगा।करवा चौथ 2026 के महत्वपूर्ण समय
चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 29 अक्टूबर 2026 को रात 01:06 बजे से
चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे तक
व्रत रखने का समय: सुबह 06:31 बजे से रात 08:17 बजे तक (कुल अवधि लगभग 13 घंटे 46 मिनट)

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